समान हक सम्मान पर / नवीन नव बीगोद

ढिंढोरा ,पीटते ,है ,हम ।
हक है ,समान दोनों का ।।

नर हो या हो ,कोई नारी ।
बराबर सम्मान दोनो का ।।

ये थोथी ,थोथी ,है,, बाते ।
बस है दिखावे, बस हाके ।।

जमाना आगे, आगे बढ़ रहा ।
 पर सोच रुके, वहीं जाके ।।

नहीं दौर, रुका ,ज़ुल्मो का ।
आतंक ,मचा ,अपनों का  ।।

एक पांव में ,जंजीर बांधी ।
दूजे को ,बक्शी ,आजादी ।।

उड़ने को, आसमा है दिया ।
रूढ़ियों की दीवार है तानी ।।

माना  आज  दौर है  बदला,।
सोचने का तौर ,ना बदला    ।।

नर तर्क ,करे तो ,सुहाता  है ।
नारी उच्ची बोले, ना भाता है ।।

नारी अपना हक ,जीते तो ।
ये दुख पिछड़ों को सताता है ।।

आज दुनिया ,तवज्जू दे रही ।
दुख हीनता ,पाले अपनों का ।।

सब  देवी को ,पुजा करते   ।
मिट्टी को सदा मां ही कहते  ।।

कथनी करनी ,को एक करो ।
सारे ग्रंथ ,यही तो, कहते ।। 

दुनिया को ना ही कोसो तुम ।
ये खेल है सारा ,विचारो का ।।

नैनों में बसे ,बस प्रेम निश्चल ।
आदर करें सबका  हर पल ।।

नारी है तो  है आज और कल  ।
इनसे ही सुनहरा है हर कल ।।

नव दौर है ,यारो ,सम हक का ।
 इस पे है हक बराबर सबका ।।

इस दौर की नारी ना अबला ।
बजा देती है  सबका तबला ।।

रूढ़ियों को तुम छोड़ो त्यागो  ।
नारी दुर्गा का रूप  ,सबला ।।

ये दौर है नारी  शक्ति  का ।
संग आगे ,आगे बढ़ने का ।।
नवीन नव बीगोद
वरिष्ठ अध्यापक  राजकीय माध्यमिक विद्यालय 
मेहता जी का खेड़ा 
जिला भीलवाड़ा

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