वे लोग - लक्ष्मी शंकर वाजपेयी
वे लोग डिबिया में भरकर पिसी हुई चीनी तलाशते थे चींटियों के ठिकाने चतों पर बिखेरते थे बाजरा के दाने कि आकर चुगें चिड़ियाँ वे …
वे लोग डिबिया में भरकर पिसी हुई चीनी तलाशते थे चींटियों के ठिकाने चतों पर बिखेरते थे बाजरा के दाने कि आकर चुगें चिड़ियाँ वे …
ढिंढोरा ,पीटते ,है ,हम । हक है ,समान दोनों का ।। नर हो या हो ,कोई नारी । बराबर सम्मान दोनो का ।। ये थोथी ,थोथी ,है,, बाते । …
बारणां में खिल्याया छै घणकरा गुलाब/ राता- धौळा- पैळा एक एक डाळ पे तीन तीन कोय पे तो ईं सूँ भी बद’र....... म्हूँ खाद पटकूँ छ…
पौसाळ जाती बेटी का हाथाँ में, नतके सौंपूँ छूँ एक पुसप गुलाब को/ सिखाबो चाहूँ छूँ अष्याँ के धसूळाँ के बीचे र्है’र भी कष्याँ …
(1) ऊँ को हेत छै जे हौंसलो द्ये छै नाहर के ताँई भी चूम लेबा को न्हँ तो कांई जेज लागे छै मनख्यावड़ा मरद ईं भी मनखखोर होबा मे…
मां कद झलाया सगळा बरत ठाह नीं पण करूं म्हैं नेम सूं, बरत री कथावां मां रै कंठां सूं निकळ’र कद बसगी म्हारै कंठां…
घर सूं गळी गळी सूं गांव गांव सूं ठाह नीं कठै-कठै भंवै भाई सिंझ्या उण सूं पैली पूगै गांव रा ओळमा समूळो घर ऊभो दीखै भा…