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सुख / अतुल कनक

बारणां में खिल्याया छै घणकरा गुलाब/ राता- धौळा- पैळा एक एक डाळ पे तीन तीन कोय पे तो ईं सूँ भी बद’र....... म्हूँ खाद पटकूँ छ…

सबक / अतुल कनक

पौसाळ जाती बेटी का हाथाँ में, नतके सौंपूँ छूँ एक पुसप गुलाब को/ सिखाबो चाहूँ छूँ अष्याँ के धसूळाँ के बीचे र्है’र भी कष्याँ …

अखबार में नाहर चूमती बायर को फोटो देख्याँ पाछै / अतुल कनक

(1) ऊँ को हेत छै जे हौंसलो द्ये छै नाहर के ताँई भी चूम लेबा को न्हँ तो कांई जेज लागे छै मनख्यावड़ा मरद ईं भी मनखखोर होबा मे…

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