मानव सेवा - राजस्थानी रचना - कवि राज कुमार बादल

कवि राजकुमार बादल ने राजस्थानी भाषा में मानव सेवा शीर्षक से लिखे इस गीत में जिन शब्दों का इस्तेमाल किया है वो न केवल काबिले तारीफ है वरन रोगियों को प्रेरणा देने वाला भी है।

बादल ने अपने गीत में लिखा है कि
मानव सेवा का व्रत धारी, नवग्रह आश्रम ने बलिहारी
ई कलयुग मे अचरज भारी, पाछे छोडी दुनियादारी
कैंसर किडनी जसी सैंकड़ों जटिल बिमारी हारी

इस भूमिका के अंतरे में कवि ने कहा कि कलयुग में आज केंसर जैसी बिमारी भी हार गयी है पर आशा की किरण नवग्रह आश्रम दिखायी देती है।

कवि ने गीत के पहले अंतरे में लिखा है कि

प्रारब्ध अर करमगति का लेखा न कूण टाले
लेर बहानु बिमारी को आवे काल समाले
मूछ्यां को बट ढीलो करदे दनदन काया गाले
बड़ी बिमारी नाम बडो तो बिलभी बडो निकाले
नकदी नमटी चढी उधारी, बिकग्या खेतकुआ घरबारी
अठे कोडियां खर्च करां बण लाखीणा बोपारी

इस अंतरे में लाखीणा बोपारी शब्द का इस्तेमाल करते हुए कवि ने कहा कि देश व दूनियां में बड़ी बिमारी के नाम पर बड़ा बिल निकाला जाता है वहीं आश्रम में कोड़ियों में ही उपचार कर लाखीणा बोपारी बना जाता है।

कवि बादल ने तीसरे अंतरे में कहा है कि

अस्पताल है नाम दुकाना ठगे डोज दे हैवी
अंगरेजी की लेर दवायां तुली घणा की लेवी
रूंख रूंख में बास देव को जडी जडी में देवी
रखो राख मन  की  मजबूती टूटी नावां खेवी
आयुष्मान भवो संसारी, हाथा डोर पतंग है थारी
हतभाग्यां का भाग जागरया आती भीड बतारी

इस अंतरे में कवि ने कहा है कि अस्पताल ठगो की तरह केवल हेवी डोज देकर रोगी को केवल झूंठा विश्वास दिला रहे है वहीं आश्रम में जड़ पत्तियों से उपचार कर रोगियों का उपचार किया जा रहा है, वहां आने वाले रोगियों की संख्या ही उनके विश्वास को बताने के लिए काफी है।

कवि बादल ने गीत के अंतिम अंतरे में लिखा है कि

कारण संग निदान बतांवां मिले न मीठी गोली
लूटपाट सूं कोसां दूरी न फेलावां झोली
सेवा को संकल्प लियो या मां मरदां की टोली
थांको सुख मांको सुख है ये बातां दूध झकोली
औगध जांची परखी सारी, सारी आयुष पर आधारी
अब जीणू है या मरणू या करलो राय शुमारी

इसमें कवि ने संदेश दिया है कि आश्रम में रोग का कारण बताने के साथ उसका निदान किया जाता है। यहां लूटपाट से दूर सेवा ही परमो धर्म के सिद्वांत पर थाकों सुख मांको सुख है को आधार मानकर सेवा की जाती है।

उल्लेखनीय है कि कवि राजकुमार बादल व्याख्याता हिन्दी के पद पर पदस्थापित है। राजस्थानी और हिन्दी भाषा के राष्ट्रीय स्तर के कवि है। इनकी रचनाओं का प्रसारण दूरदर्शन के राष्ट्रीय और प्रादेशिक चैनलों और आकाशवाणी के माध्यम से समय समय पर होता रहा है। हिंदी भाषा में लिखी गई इनकी प्रमुख रचनाओं में कीरत बारी, हल्दीघाटी, शहीद की मां एवं राजस्थानी में माचा की दावन ,टमको, मरवा मोगरा की सोरम जैसी रचनाओं ने इन्हें लोक कवि का दर्जा दिया है।

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